21 फ़रवरी, 2008

डॉ. राम प्रकाश द्विवेदी की क्लास


साभार-जागरण जोश 23/10/2007
नॉलेज व लैंग्वेज पर हो कमांड तो जर्नलिज्म की राह होगी आसान
अधिकतर स्टूडेंट्स के सामने यह समस्या आती है कि वे किन बातों पर गौर करें, जिससे अपने विषय/कोर्स पर उनकी अच्छी पकड़ बन सके और वे नॉलेज हासिल करने के साथ-साथ परीक्षा में टॉप भी कर सकें। अपनी इस उलझन को सुलझाने के लिए इस बार अटेंड कीजिए दिल्ली यूनिवर्सिटी के बी. आर. अंबेडकर कॉलेज में हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार पाठयक्रम के समन्वयक डॉ. राम प्रकाश द्विवेदी की क्लास.
हिंदी पत्रकारिता एवं जनसंचार मीडिया जगत के विस्तार की जरूरतों को पूरा करने के लिए एक महत्वपूर्ण कोर्स है। दिल्ली यूनिवर्सिटी के चार कॉलेजों-अदिति, बी. आर. अंबेडकर, श्री गुरुनानक देव खालसा और रामलाल आनंद कॉलेज में यह कोर्स ग्रेजुएट (ऑनर्स) स्तर पर पढाया जाता है। इस कोर्स में बेहतर प्रदर्शन के लिए इन बातों का ध्यान रखें :
मास कम्युनिकेशन के लिए आपका इंट्रा-पर्सनल और इंटर-पर्सनल कम्युनिकेशन ठीक हो। सामयिक मुद्दों पर सोच-विचार करें तथा साथियों से चर्चा-बहस भी करें।
क्लास नियमित अटेंड करें और प्राध्यापकों के लगातार संपर्क में रहें।
व्यावहारिक प्रशिक्षण के लिए मीडिया संस्थानों का भ्रमण करें और फील्ड में काम करने वाले लोगों के संपर्क में रहें।
क्वार्क, यूनिकोड, पिनाकल, वीसीडी कटर और साउंड रिकॉर्डिग से संबंधित सॉफ्टवेयर्स की जानकारी हासिल करें।
सेमिनार, फिल्म फेस्टिवल, डिबेट, प्रदर्शनियों के लिए समय निकालें।
हिंदी के साथ-साथ अंग्रेजी में लिखने-पढने और बोलने की क्षमता का विकास करें।
सिलेबस से हों रू-ब-रू
इस कोर्स के फ‌र्स्ट इयर के सिलेबस में तीन प्रश्नपत्र शामिल हैं। पहला-हिंदी भाषा, दूसरा-भारत : सामान्य परिचय और तीसरा-संचार सिद्धांत और ऐतिहासिक विकास। पहला पेपर हिंदी भाषा के इतिहास से संबंधित है। हिंदी भाषा एवं शब्द के उद्भव एवं विकास के साथ ही इसके भौगोलिक विस्तार के संबंध में भी आपको पढना होगा। इस पेपर में दूसरा टॉपिक हिंदी की बोलियों और शैलियों से संबंधित है। खडी बोली, अवधी, ब्रज, भोजपुरी बोलियों के साथ हिंदी भाषा में फारसी, उर्दू, संस्कृत और अंग्रेजी के मिश्रण का भी अध्ययन करना होगा। हिंदी भाषा के मानकीकरण की संकल्पना और मानक हिंदी के स्वरूप को समझना अनिवार्य है। आधुनिकीकरण हिंदी भाषा और समाज की एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। हालांकि, आधुनिकीकरण में समस्याएं भी बहुत हैं, इन्हें भी जानें। हिंदी आज अनेक प्रयोजनों के लिए उपयोग में लाई जा रही है, जिनमें शिक्षा, सूचना और विज्ञापन प्रमुख हैं। हिंदी में अभिव्यक्तियां और शब्द रोज जुड रहे हैं, इन्हें जानें-समझें। ध्वनि और लिपि के कोड (स्वर और अक्षर) में आए परिवर्तनों को भी आपको जानना होगा। पहले प्रश्नपत्र का अंतिम टॉपिक अखबारी हिंदी पर केंद्रित है, जो भविष्य में आपके प्रोफेशन से ही पूरी तरह जुडा हुआ है। अखबारी हिंदी के लिए आपको विभिन्न अखबारों में प्रयुक्त की जा रही हिंदी भाषा की शैली को जानना-समझना होगा। ये पांचों टॉपिक 20-20 अंकों में विभाजित हैं और सामान्यत: इनमें से प्रत्येक पर एक प्रश्न अवश्य पूछा जाता है।
दूसरा प्रश्नपत्र भारत के सामान्य भूगोल, इतिहास (आधुनिक काल), संविधान, अर्थव्यवस्था, सामाजिक संस्कृति (धर्म, दर्शन, वर्ण-व्यवस्था), भारतीय भाषाओं तथा वैज्ञानिक, कलात्मक एवं खेलकूद संबंधी विषयों पर केंद्रित है। इसमें भी कुल पांच टॉपिक हैं, जिनको 20-20 अंकों में बांटा गया है। इस पेपर का उद्देश्य आपकी सामान्य जानकारी को बढाना है। भारत की भौगोलिक स्थिति, प्राकृतिक संसाधनों का लेखा-जोखा, जलवायु बहुलता एवं उपयोगिता तथा प्रमुख व्यापारिक केंद्रों को जानना न केवल इस पेपर के लिए जरूरी है, बल्कि आगे भी यह आपके काम आएगा। संविधान की विशेषताओं, मौलिक अधिकारों, कर्तव्यों के साथ-साथ नीति-निर्देशक तत्वों की जानकारी भी आपको हासिल करनी होगी। आधुनिक भारत के इतिहास को देखें, तो औरंगजेब के पतन के बाद नई स्थितियों के उदय, 1857 का स्वाधीनता संग्राम, भारत में मुद्रण और अखबारों का विकास, खडी बोली का आविर्भाव, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस एवं विभिन्न समाज सुधार आंदोलनों की अनुगूंज का अध्ययन जरूरी है। भारतीय स्वाधीनता आंदोलन के नायकों-महात्मा गांधी, सरदार भगत सिंह, राजगुरु, सुखदेव, चंद्रशेखर आजाद, राम प्रसाद बिस्मिल आदि के योगदान को भी पढें। विभाजन, असहयोग आंदोलन, सविनय अवज्ञा, भारत छोडो आंदोलन आदि को जानकर ही आप आधुनिक भारत के प्रति अपनी समझ को और बेहतर कर सकते हैं। नब्बे के दशक के बाद भारत के बदलते परिदृश्यभूमंडलीकरण, उदारीकरण और उपभोक्तावादी स्थितियों को समझे बिना आप आज के समय से रू-ब-रू नहीं हो सकते। इसी प्रकार संविधान, अर्थव्यवस्था और संस्कृति से संबंधित विभिन्न आयामों का अध्ययन भी करना चाहिए। संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल प्रमुख भारतीय भाषाओं की जानकारी भी प्राप्त करें। तीसरा पेपर संचार की थ्योरी से जुडा है। इसके तहत कम्युनिकेशन, इसकी परिभाषा, विशेषताओं, प्रकार और विकास को समझें। पत्रकारिता और समाचार पत्रों की स्थिति और उसकी विभिन्न समस्याओं-आर्थिक, सामाजिक तथा व्यावसायिक पक्षों का ज्ञान हासिल करें। हिन्दी सहित प्रमुख भारतीय भाषाओं के समाचार पत्रों का ढांचागत अध्ययन भी करें। इस पेपर का अंतिम टॉपिक आधुनिक संचार प्रणाली पर केंद्रित है। पत्र-पत्रिकाओं, रेडियो, टेलीविजन, सिनेमा और इंटरनेट जैसे जनसंचार माध्यमों का विकास, प्रसार, प्रभाव और इनके नियंत्रण के प्रयत्नों को जानना-समझना इस पेपर के लिए अपेक्षित है। प्रमुख संचार संगठनों यानी मीडिया समूहों की कार्यविधि और प्रभाव के बारे में जानना बेहद जरूरी है। फीडबैक की अवधारणा और तौर-तरीके व लाभ-हानि को भी जानें। जनमत संग्रह-फीडबैक के संबंधों की भी तलाश करें।
नोट्स भी बनाएं
प्राध्यापकों के लेक्चर्स को ध्यान से सुनें और उसके मूल बिंदुओं को नोट करें।
पढाए गए टॉपिक्स को दो-तीन किताबों से कंसल्ट करें और फिर नोट्स बनाएं।
तथ्यों और आंकडों को नोट करते समय विशेष सावधानी बरतें और समय-समय पर उनको अपडेट करते रहें। इनकी क्रॉस चेकिंग भी जरूरी है।
टॉपिक से संबंधित ताजा जानकारी मिले, तो उसे नोट्स में तत्काल जोडें।
जरूरी नहीं कि हर नोट्स विस्तृत रूप में बनाया जाए। महत्व को ध्यान में रखते हुए डिटेल्ड और शॉर्ट नोट्स बना सकते हैं।
नोट्स को हमेशा अपने प्राध्यापकों से चेक करवाते रहें।
अखबार
दैनिक जागरण,
जनसत्ता, द हिन्दू
मैगजींस/जर्नल
विदुर, संचार, माध्यम, मीडिया विमर्श, फ्रंट लाइन, रंग-प्रसंग, हंस, इंडिया टुडे, दीवान-ए- सराय, मीडिया नगर लाइब्रेरी हैं खास
कुछ अच्छी लाइब्रेरियों में विजिट करना भी आपके लिए लाभदायक साबित हो सकता है। इनके नाम हैं : सेंट्रल लाइब्रेरी, डीयू
रतन टाटा लाइब्रेरी,डीयू
मास कम्युनिकेशन रिसर्च सेंटर की लाइब्रेरी, जामिया मिलिया इस्लामिया,
ब्रिटिश काउंसिल, कनॉट प्लेस
साहित्य अकादमी लाइब्रेरी, मंडी हाउस
सफलता का मूल मंत्र
क्लास नोट्स को घर पर रेगुलर देखें। अगली क्लास में पढाए जाने वाले टॉपिक को पहले से पढ कर जाएं।
टीवी, रेडियो के कार्यक्रमों को देखें-सुनें और इनका मूल्यांकन करें। फिल्म समीक्षा भी करें।
इंटरनेट पर सामग्री की तलाश करें, लेकिन संयम भी बरतें, वरना फालतू की साइट्स सर्च करने में आपका बेशकीमती समय नष्ट हो जाएगा।
अच्छे लोगों से संपर्क बनाएं। उनके साथ उठने-बैठने से आपकी प्रतिभा विकसित होगी। नए अवसर बनेंगे और आपका आत्मविश्वास भी बढेगा।
अंग्रेजी भाषा में भी लिखने और बोलने का अभ्यास करें।
प्रमुख अनुशंसित पुस्तकें बुक्स लेखक
हिंदी भाषा का इतिहास धीरेंद्र वर्मा
भाषा और समाज राम विलास शर्मा
सूचना, संप्रेषण एवं समाज बी.एस.निगम
पत्रकार और पत्रकारिता प्रशिक्षण अरविंद मोहन
नए संचार माध्यम और हिंदी अचला शर्मा, सुधीश पचौरी
भारत की समाचार पत्र क्रांति रॉबिन जेफ्री प्राचीन भारत का सामाजिक इतिहास जयशंकर मिश्र
वैष्णव धर्म का उद्भव एवं विकास सुवीरा जायसवाल
भारतीय संस्कृति गोविंद चंद्र पांडेय
ग्रोथ ऐंड डेवॅलपमेंट ऑफ कम्युनिकेशन इन इंडिया जे.वी.विलानियम
मेकिंग न्यूज उदय सहाय द्वारा संपादित
कम्युनिकेशन रेमंड विलियम
कुछ अच्छी वेबसाइट्स
www.jagran.com
http://www.webdunia.com/
http://www.bbchindi.co/m
www.ddindia.com
http://www.indiantelevision.com/
www.hindimediaglobe.wordpress.com
http://www.hi.wikipedia.com/
प्रस्‍तुति
मुनमुन प्रसाद श्रीवास्तव

1 टिप्पणी:

Anoop ने कहा…

महोदय

नमस्कार

आपसे विनम्र अनुरोध है कि कृपया बताएं क्या जनसंचार और जनसम्प्रेषण समानार्थी शब्द है ?

क्या ये शब्द एक दूसरे के पर्याय है ? Mass Communication को हिंदी में क्या लिखना चाहिए ?


धन्यवाद