31 मई, 2010

जातिगणना पर बवाल क्‍यों?


आजकल जाति आधारित जनगणना पर घमासान छिड़ा हुआ है। तमाम समाचारपत्रों लेकर टी0वी0शो तक इस बात को उठा चुके हैं।जहाँ तक सवर्णों की बात है तो लोग ये मान कर चल रहे हैं कि संख्‍या के हिसाब से सत्‍ता और व्‍यवस्‍था में उनकी भागीदारी कई गुना अधिक है और इस जनगणना से उनकी पोल खुल जाएगी।ब्राह्मण,क्षत्रिय और वैश्‍य तो निश्चित तौर पर इस भेद को खुलने नहीं देना चाहते क‍ि उनकी संख्‍या से उनका वर्चस्‍व कितना अधिक है।लेकिन एक बात और है यादव,कुर्मी,कोइरी,जाट और मीणा भी अभी भले ही इस बात से खुश हो ले कि जाति गणना में वे ताकतवर होकर निकलेंगे और संभवत: मलाई का बड़ा हिस्‍सा उनकी झोली में आ जाएगा लेकिन अब न तो सवर्णों की मिथ्‍या युक्ति काम आएगी और न ही ओ0बी0सी0,एस0सी0,एस0टी0 के मलाई दार तबकों की गलतफहमी ही। मीणाओं ने आदिवासी आरक्षण का एक बड़ा हिस्‍सा निगल लिया है और इसी समूह का अन्‍य तबका वंचित रह गया है। इसीप्रकार ओ0बी0सी0 के मोटे हिस्‍से पर यादव और कुर्मियों ने कुंडली मार रखी है। यह सब अब चलने का नहीं। जाति के भीतर जातियों का शोषण चल रहा है। हमें इस जाति गणना में न केवल तीन स्‍तरों ओ0बी0सी0,एस0सी0,एस0टी0 पहचानने होंगे अपितु ऐसी व्‍यवस्‍था करनी होगी जिससे जाति के भीतर से निष्‍काषन का भी प्रावधान हो और मलाईदार जातियों को सामान्‍य जाति के तहत लाकर उन्‍हें सरकारी सुख सुविधाओं के बेजा इस्‍तेमाल से रोककर उस अवसर को अन्‍य वंचित जातियों के लिए उपलब्‍ध कराया जा सके। सवर्णों की बेईमानी और मलाईदार जातियों की चालाकी दोनों का विरोध इस जाति आधारित जनगणना में किया जाना चाहिए। मायावती की संपत्ति उनके अपने ही हलफनामें के अनुसार 88 करोड़ है, अब उनकी किस पीढ़ी को आरक्षण चाहिए और क्‍यों ?
अब समय के बदलाव को पहचानना चाहिए और ईमानदारी से भरी सोच के साथ आगे बढ़ने की जरूरत है।

2 टिप्‍पणियां:

माधव ने कहा…

i do not agree with you

banna ram meena ने कहा…

सर मै आपकी बात से असहमत हूं क्योकि एक दो जिलों के मीणों ने फायदा ले भी लिया तो क्या सभी देश के मीणों का विकास हो गया क्या ??? और यह बात सभी जातियों पर भी लागू होती है जिनको आरक्षण मिला हुआ है .देश के कई राज्यों मे जाकर देखो सर ईन सभी को अभी पचास साल और आरक्षण की जरुरत है ।